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नारायणी माता का धाम , Alwar , Rajasthan

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 नारायणी माता का धाम , Alwar , Rajasthan                                      नारायणी माता नारायणी माता मंदिर भारत में सैन समाज का एकमात्र मंदिर है जिसकी पवित्रता माउंट आबू, पुष्कर और रामदेवरा में मंदिरों के समान मानी जाती है। यह मंदिर सैन समाज के लिए उनकी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। जहा वसंत मोसम के दोरान देश के बिभिन्न कोनो से तीर्थ यात्रियों के भीड़ देखी जाती है। इस मंदिर में बनिया (अग्रवाल) को जाने की अनुमति नहीं है। 1993 से पहले हर साल मंदिर स्थल पर स्थानीय लोगों द्वारा एक बड़े मेले का आयोजन किया जाता था, जिसे स्वर्गीय श्री राजीव गांधी द्वारा प्रतिबंधित किया गया था। यदि आप अपने सांसारिक जीवन के सभी तनावों से दूर कुछ समय शांति और आस्था का अनुभव करना चाहते है तो आपको अलवर के इस पवित्र मंदिर की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, नारायणी माता, भगवान शिव की पहली पत्नी सती का अवतार मानी जाती है। माना जाता है कि जब नारायणी पहली बार अपने ससुराल जा रही थीं, तो घर जाते स...

नागौर जिले के टॉप 5 पर्यटन स्थल और नागौर जिले का इतिहास

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नागौर जिले के टॉप 5 पर्यटन स्थल और नागौर जिले का इतिहास नागौर जिले के टॉप 5 पर्यटन स्थल और नागौर जिले का इतिहास नागौर जिले का इतिहास नागौर भारत के प्राचीन झत्रियो द्वारा बनाये गये दुर्गो में से एक है, जिसका महाभारत के इतिहास में भी उल्लेख मिलता है। प्राचीन में यह नागौर और अहिछत्रपुर दोनों नामो से विख्यात था। कहा जाता है कि अहिछत्रपुर राज्य को अर्जुन ने जीत कर अपने गुरु द्रोणाचार्य को अर्पित कर दिया था। नागौर के कुछ जगह मीरा और अबुल फज़ल के जन्म स्थान भी माने जाते है। नागौर जिले के मेड़ता में चारभुजा और पार्श्वनाथ मंदिर और नागौर शहर में सूफी संत टार्किन की दरगाह है। नागौर महान राव अमर सिंह राठौर की वीरता का भी गवाह था जिसने शक्तिशाली मुगल साम्राज्य को चुनौती दी थी।  नागौर जिले के पर्यटक स्थल (1). नागौर का किला – नागौर का किला नागौर के पर्यटक स्थलों में सबसे पहले आता है पहले के समय में इसे युद्धों के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, इसकी ऐतिहासिक वास्तुकला इसे राज्य के महत्वपूर्ण स्थानों में से एक बनाती है। किला का निर्माण  4 वीं शताब्दी के आसपास नागवंशियों द्वारा किया गया था और ...

नाहरगढ़ किला जयपुर राजस्थान

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 नाहरगढ़ किला जयपुर नाहरगढ़ किला जयपुर नाहरगढ़ का किला भारत के सबसे मशहूर किलों में से एक हैं । नाहरगढ़ किले को लोग देखने के लिए आते रहते हैं और यहां पर इंजॉय करते हैं दोस्तों नाहरगढ़ किले को हांटेड किला भी कहा जाता है यहां पर कई ऐसी घटनाएं हुई जिसके के बाद इस किले को हॉन्टेड पैलेस के नाम से भी जाना जाता है नाहरगढ़ किले का निर्माण राजा जयसिंह ने 1734 में करवाया । नाहरगढ़ का किला जयपुर को घेरे हुए अरावली पर्वतमाला के ऊपर बना हुआ है। आरावली की पर्वत श्रृंखला के छोर पर आमेर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस किले का निर्माण सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। यहाँ एक कहानी प्रचलित है कि कोई एक नाहर सिंह नामके राजपूत की प्रेतात्मा वहां भटका करती थी। 

भर्तृहरि बाबा धाम अलवर

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 भर्तृहरि बाबा धाम अलवर भरतरी बाबा धाम अलवर में स्थित है अलवर से लगभग 40 किलोमीटर आगे जाने के बाद भरतरी तिराया आता है वहां से बाबा का मंदिर लगभग 5 किलोमीटर आगे स्थित है अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है | सबसे प्राचीन पवित्र स्थलों में से एक है। जो आस्था और शांति का महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु है। मंदिर का नाम भरत  (उज्जैन का शासक) के नाम पर रखा गया है। मंदिर पारंपरिक राजस्थानी शैली में विस्तृत दीर्घाओं, शिखर और मंडपों के पुष्प डिजाइन किए गए स्तंभों के साथ बनाया गया है। जो अलवर में ऐतिहासिक महत्व रखता है। भरतरी तीराया से मंदिर जाने के बाद वहां पर आपको चारों तरफ बहुत ही मनोरम दृश्य देखने को मिलेगा खिलौनों की दुकान मिठाइयों की दुकान और भी बहुत ही प्रकार की दुकानें वहां पर मिलेंगी और वहां पर बहुत ही सुंदर कलाकृतियों का अद्भुत बेजोड़ नमूना है सामने से प्रवेश करते ही आपको महाराज भरतरी की प्रतिमा देखने को मिलेगी उसके बाद में दोस्तों आप वहां से आगे जाएंगे तो झरना बहता हुआ मिलेगा जो कि हमेशा बहता रहता है आगे जाने पर आपको अनेक मंदिर मिलेंगे जो कि दोस्तों वहां का मनोरम दृश्य बढ़ाते हैं जैसे ...

चित्तौड़गढ़ का किला

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 चित्तौड़गढ़ का किला Chittorgarh Fort चित्तौड़गढ़ के महान राजा हुए महाराणा प्रताप चित्तौड़गढ़ का रक्त हमेशा खून खोलता है | चित्तौड़गढ़ राजस्थान राज्य में स्थित है चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी थी इसे महाराणा प्रताप का गढ़ भी कहा जाता है और रानियों ने जोहर किया इसलिए इसी जोहर गढ़ भी कहा जाता है |  चित्तौड़गढ़ का इतिहास chittorgarh fort चित्तौड़गढ़ राजस्थान राज्य का सबसे प्राचीन दुर्ग है चित्तौड़गढ़ को चित्रकूट अरावली पर्वतमाला पर बनाया गया है चित्तौड़गढ़ का निर्माण सातवीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य के द्वारा करवाया गया (1).  चित्तौड़गढ़ 7 द्वार हैं     1.पांडुपोल , 2.भैरव पॉल , 3. गणेश पॉल , 4.लक्ष्मण पॉल , 5.जोड़न पॉल , 6.त्रिपोलिया पॉल , 7.रामपाल पॉल है (2).    जयमल की हवेली का निर्माण महाराजा उदय सिंह के काल में हुआ । (3).    चित्तौड़गढ़ दुर्ग में विष्णु के वराह अवतार का कुंभ श्याम मंदिर है । (4).    महाराणा कुंभा ने विजय स्तंभ , कुंभ स्वामी मंदिर , कुंभा के महल , चारदीवारी सात दरवाजा का निर्माण करवाया था । (5).  विजय स्तंभ ...

भानगढ़ का किला –भानगढ़ कैसे पहुंचे

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भानगढ़ का किला भानगढ़ का किला 17 वी शताब्दी का किला है इसका निर्माण श्री राजा मानसिंह द्वारा बनाया गया था मुगल सम्राट अकबर की अदालत में मंत्रियों में एक थे किला विशेष रूप से माधव सिंह जी के लिए बनाया गया था किला बहुत ही पुराना और अपने आप में बहुत सारी यादें समाए हुए हैं राजस्थान सरकार द्वारा इसको  संरक्षित किया गया है और इसे अच्छी तरह बनाए रखने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है इसे भारत का भूतिया किला भी माना जाता है इसमें अनेक मंदिर भी बनाए गए थे जो की बहुत ही भव्य मंदिर है और इनका निर्माण भी पुराने समय में ही हुआ था भानगढ़ किले की लोकप्रिय प्रेत कथाएं कथाएं इस प्रकार से है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुंदर महिला थी और एक बहुत बड़ा जादूगर था जो रत्नावती से प्रेम करता था उससे शादी करना चाहता था एक दिन रत्नावती अपनी सहेली के साथ बाजार में जाती है इत्र खरीदने के लिए उस मौके का फायदा जादूगर उठाना चाहता था और वह जादूगर जिस इत्र को रत्नावती खरीदती है उसे इत्र को वह बदल देता है किसी तरह रत्नावती को यह मालूम होता है कि उसकी इत्र की शीशी जादू की इत्र की शीशी से बदल दी गई है उस ...